बजट 2026-2027  - एमएसएमई को ’चैम्पियन’ बनाने की चाह, ‘नए वर्ल्ड ऑर्डर’ में भारत की मजबूत राह
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बजट 2026-2027 - एमएसएमई को ’चैम्पियन’ बनाने की चाह, ‘नए वर्ल्ड ऑर्डर’ में भारत की मजबूत राह

📅 13 Feb 2026

भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने का रास्ता गली-मोहल्लों या आम रास्तों में चल रहे छोटे व मंझले उद्योगों (स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज, एसएमई) से होकर ही गुजरता है। इसकी एक बड़ी वजह है, देश में रोजगार का बड़ा हिस्सा इसी सेक्टर से आता है। भारत सरकार के आर्थिक रोडमैप में माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज, (एमएसएमई) सेक्टर को रीढ़ माना जाता है। इस अहमियत के चलते ही ट्रेड वॉर और ट्रेड डील्स के वैश्विक प्रभाव (ग्लोबल इम्पैक्ट) के बीच भारत सरकार की आर्थिक रणनीति के केंद्र में इस बार एमएसएमई सेक्टर है।  यही वजह है कि बजट 2026 में केंद्र सरकार की ओर से एमएसएमई को ’पहले कर्तव्य’ के तहत प्राथमिकता दी गई है।

जिससे देश के सभी छोटे उद्योग ’ग्लोबल कॉम्पिटीशन’ के लिए मजबूती से तैयार हो सकें। इसका मकसद उन छोटी कंपनियों की पहचान करना और उन्हें बढ़ावा देना है, जिनमें भविष्य का दिग्गज बनने की क्षमता है।  इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि केंद्रीय बजट 2026 के केंद्रबिन्दु में रखे गए एमएसएमई सेक्टर, छोटे व मध्यम उद्योग, कारीगरों का कौशल विकास, सूक्ष्म उद्योग, महिलाओं व युवाओं की आत्मनिर्भरता एवं उनकी उद्यमिता और ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था पर कैसे विशेष जोर दिया गया है।

नए वर्ल्ड ऑर्डर में भारत ’सबसे बड़ा खिलाड़ी’

27 जनवरी 2026 को यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के साथ भारत की ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील हुई। इसे ’मदर ऑफ़ ऑल डील्स’ कहा गया। ठीक 7वें दिन 3 फरवरी को अमेरिका के साथ ट्रेड डील में सुधार हुआ और टैरिफ में 50 परसेंट से 18 परसेंट तक की कटौती हो गई। ग्लोबल इकोनॉमिक उलटफेर वाली इन दोनों ही घटनाओं के बीच में भारत सरकार का केंद्रीय बजट 1 फरवरी 2026 को आया। इन तीनों अहम तारीख और घटनाओं ने भारत में उद्योग जगत खासकर एमएसएमई (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज) के लिए अभूतपूर्व ग्रोथ के नए दरवाजे खोल दिए हैं।

इससे भारत की मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता में बढ़ोतरी होगी, छोटे व मध्यम उद्योग के जरिए क्वालिटी प्रोडक्ट्स तैयार होंगे, जो विदेशों तक में अपनी पहचान बनाकर खुद को ग्लोबल ब्रांड के तौर पर स्थापित करेंगे। इतना ही नहीं, भारत के कारीगरों, सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग के कारोबारियों, महिला व युवा उद्यमियों की उन्नति व आमदनी में भी इजाफा होगा। 10 फरवरी 2021 को कोविड के दौरान संसद में पीएम नरेन्द्र मोदी ने ऐलान किया था कि दुनिया का वर्ल्ड ऑर्डर तेजी से बदल रहा है और इस नए वर्ल्ड ऑर्डर में भारत एक मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरेगा। 15 साल बाद यह बात सच साबित हो रही है। 

10 हजार करोड़ से छोटे-मंझले बिजनेस बनेंगे चैम्पियन

एक विकासशील देश में अक्सर फंड की कमी से अच्छे आइडिया वाले छोटे बिजनेस या तो शुरू ही नहीं हो पाते और अगर किसी तरह शुरू हो भी गए तो अक्सर कुछ समय बाद दम तोड़ देते हैं। विकसित भारत-2047 के सपने को पूरा करने में यह सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।

बजट 2026 में सरकार ने अपने छोटे व मध्यम उद्योगों को फंड की कमी से उबारने और संवारने के बाद चैम्पियन बनाने की ठानी है। इसी कड़ी में बजट में जारी किया गया 10,000 करोड़ रुपये का भारी भरकम फंड ऐसे ही स्टार्टअप्स और मध्यम उद्योगों के लिए ऑक्सीजन का काम करेगा। इतना ही नहीं, यह फंड आंत्रप्रेन्योर्स को मुश्किल क्रेडिट माहौल में भी फंड हासिल करने में भी पूरी मदद करेगा। सरकार अपने इस कदम से न सिर्फ देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को रफ्तार देना चाहती है, बल्कि सभी छोटे कारोबारियों को मजबूत बनाकर उन्हें देश की अर्थव्यवस्था का चैम्पियन खिलाड़ी बनाना चाहती है।

200 इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स को नई जिंदगी

भारत के कई शहरों में ऐसे इंडस्ट्रियल इलाके (क्लस्टर्स) हैं जो दशकों पुराने हैं। इन क्लस्टर्स में न तो बेहतरीन आधुनिक सड़कें हैं और न ही नई तकनीक ही वहां तक अपनी पहुंच बना सकी है। बजट में देश के इन्हीं 200 पुराने इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स को एक बार फिर से पुर्नजीवित (रिवाइव) करने पर जोर दिया गया है। जिससे इन पुराने बिजनेस क्लस्टर्स को अपना मजबूत ’कमबैक’ करने में मदद मिलेगी। यह कदम उन सभी कंपनियों के लिए एक नई लाइफलाइन होगा, जो क्रेडिट स्ट्रेस और पुरानी टेक्नोलॉजी के कारण समय के साथ कमजोर हो गई हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के जरिए जहां इन पिछड़े इलाकों में बिजली, पानी और सड़कों की स्थिति सुधारी जाएगी। वहीं टेक्नोलॉजी अपग्रेड के जरिए इन बिजनेसेस में पुरानी मशीनों की जगह नई तकनीक लाने के लिए सरकार भरपूर मदद करेगी। जब ये क्लस्टर्स आधुनिक होंगे, तो वहां बनने वाला सामान सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचेगा और अन्य विदेशी कंपनीज से मुकाबला कर सकेगा।

’आत्मनिर्भर भारत’ को 2000 करोड़ की सौगात

किसी भी देश का समग्र विकास तभी संभव है जब हर स्तर पर हर उद्योग को बढ़ावा और सहयोग मिले। यही वजह है कि 2026 के बजट में सिर्फ छोटे और मध्यम उद्योगों पर ही नहीं, बल्कि सबसे छोटे यानी सूक्ष्म उद्यमों पर भी सरकार की पैनी नज़र है। सरकार ने ’सेल्फ-रिलायंट इंडिया फंड’ में 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि जोड़ने का फैसला किया है।

इस कदम से यह पैसा देश के उन तमाम छोटे कारोबारियों और कारीगरों को मदद देगा जो जमीनी स्तर पर ’मेक इन इंडिया’ के संकल्प को सफल बना रहे हैं। मार्केट एक्सपट्र्स ने उम्मीद जताई है कि सरकार का यह कदम ट्रेड फाइनेंस चेन को भी एक नई स्पीड देगा। वहीं देश में लाखों छोटे-छोटे उद्यमों को भी सपोर्ट करेगा, जिन्हें गारंटी वाली क्रेडिट स्कीम की कमी के कारण बिजनेस में टिके रहने में मुश्किल होती है।

TReDS: MSMEs का बिल पेमेंट का इंतजार खत्म

बिजनेस की दुनिया में सबसे आम और बड़ी दिक्कत है ’फंसा हुआ पैसा’ यानि पेंडिंग पेमेंट। कारोबारी काम करते हैं, माल या सर्विस प्रोवाइड करते हैं लेकिन उन्हें इसका समय पर भुगतान नहीं होता। जो पेमेंट होता भी है तो अक्सर आधा-अधूरा। सरकारी काम-काम में तो यह दिक्कत और भी ज्यादा देखने को मिलती है। सभी कारोबारियों खासकर छोटे व मंझले व्यवसायियों की इस परेशानी को सुलझाने के लिए ही बजट 2026 में TReDS (Trade Receivables Discounting System) प्लेटफॉर्म की व्यवस्था पर चार प्रमुख ऐलान किए गए हैं-

1- सभी सरकारी कंपनियों (CPSEs) के लिए अब TReDS के जरिए ही पेमेंट सेटलमेंट करना अनिवार्य होगा।
2- इनवॉइस डिस्काउंटिंग के लिए क्रेडिट गारंटी सपोर्ट दिया जाएगा।
3- सरकारी खरीद की जानकारी के लिए GeM पोर्टल को TReDS से जोड़ा जाएगा, जिससे सस्ता और जल्दी कर्ज मिल सके।
4- TReDS से मिलने वाले पैसे को ’एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज’ के तौर पर पेश किया जाएगा, जिससे मार्केट में नकदी बढ़ेगी।

इस नई व्यवस्था से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (PSU) की ओर से MSMEs से खरीद के लिए TReDS को वन-स्टेप प्लेटफॉर्म बनाना अनिवार्य हो जाएगा। इतना ही नहीं MSMEs के लिए, क्रेडिट गारंटी स्कीम सपोर्ट भी शुरू किया जाएगा और तेज फाइनेंसिंग के लिए गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) को TReDS से जोड़ा जाएगा। इन बदलावों से एक तरह से सेकेंडरी मार्केट का विकास होगा और लिक्विडिटी ट्रांजैक्शन बढ़ेंगे। जिससे कारोबारियों, इनमें काम करने वाले कारीगरों और उद्योगों को आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा और व्यवसाय कैशफ्लो की कमी से प्रभावित नहीं होंगे।

’कॉर्पोरेट मित्र’- MSMEs के भरोसेमंद साथी 

अगर MSMEs किसी देश की रीढ़ हो तो इसे मजबूती देने के लिए सभी खास उपाय करने ही चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए बजट 2026 में देश के छोटे व मंझले उद्योगों को सही मार्गदर्शन देकर उनके सफल संचालन के लिए ’ कॉर्पोरेट मित्रों’ की मदद ली जाएगी। सरकार की मंशा प्रोफेशनल संस्थानों जैसे ICAI, ICSI और ICMAI की मदद से शॉर्ट-टर्म मॉड्यूलर कोर्स और व्यावहारिक टूल्स तैयार कराने की है।

इसका लक्ष्य टियर-2 और टियर-3 शहरों में बेहतर तरीके से प्रशिक्षित ’कॉर्पोरेट मित्र’ की एक नई कैडर तैयार करना है। इन ’कॉर्पोरेट मित्रों’ को पैराप्रोफेशनल्स के रूप में मान्यता दी जाएगी, जो छोटे और मध्यम उद्योगों को कम लागत में अनुपालन पूरा करने में सहायता करेंगे। अभी MSMEs के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को समझना मुश्किल ही नहीं बल्कि महंगा भी साबित होता है। जिससे छोटे उद्योगों पर असर पड़ता है। ऐसे में यह नई कैडर उन्हें किफायती, आसान और भरोसेमंद सपोर्ट देने के लिए तैयार की जाएगी। ’ कॉर्पोरेट मित्र’ योजना छोटे उद्योगों को मजबूत बनाकर विकास की गति को तेज करेगी।

गांवों में ’आधी आबादी’ के लिए SHE-Marts

देश का विकसित होने का सपना तभी पूरा होगा जब शहर ही नहीं बल्कि गांव भी विकसित बनें और यह तभी संभव है जब गांवों की महिलाएं भी आत्मनिर्भर हो और आर्थिक विकास में अपना पूरा योगदान दे सकें। बजट 2026 में ग्रामीण भारत की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए SHE-Marts प्लेटफॉर्म स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है, जो ग्रामीण महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे बिजनेस को बाजार से जोड़ने में मदद करेंगे। इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी की गई है। इस खास पहल का मकसद महिलाओं को सिर्फ कर्ज देकर उन्हें अपनी रोजी-रोटी कमाने भर का आत्मनिर्भर बनाना ही नहीं हैं। बल्कि इससे आगे बढ़ाकर उन्हें खुद के व्यवसाय का मालिक बनाना भी है। जिससे उनकी आमदनी स्थायी रूप से लगातार बढ़ सके और वे दूसरी महिलाओं को भी रोजगार देकर आत्मनिर्भर गांव का सपना पूरा करें।

’अन्नदाताओं’ की आमदनी बढ़ाने पर फोकस

विकसित राष्ट्र के तौर पर भारत की पहचान तब तक स्थापित नहीं हो सकती जब तक देश के किसानों को इस विकास का फायदा न पहंुचे। इसलिए सरकार ने छोटे व मध्यम उद्योगों, कारीगरों, उद्यमियों, युवाओं और महिलाओं को उन्नत व आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही अपने ’अन्नदाताओं’ पर स्पेशल फोकस किया है। बजट 2026 में सरकार ने देश के किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने को प्राथमिकता दी है। इस कड़ी में ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास पर काम किया जाएगा। ऐसा होने पर मछली पालन से जुड़ी गतिविधियां न सिर्फ बढ़ेंगी बल्कि किसानों व ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय के मौके मिलेंगे। बजट 2026 में पशुपालन क्षेत्र में आंत्रप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने पर भी फोकस किया गया है। इससे गांवों में सिर्फ पारंपरिक खेती पर ही निर्भरता कम करने और पशुपालन से जुड़े व्यवसायों के जरिए नए रोजगार पैदा करने पर जोर रहेगा।

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