आधी दुनिया का साझेदार और अमेरिकी टैरिफ पर जवाबी वार यूपी कैसे बना इंडिया के लिए गेमचेंजर?
Blog

आधी दुनिया का साझेदार और अमेरिकी टैरिफ पर जवाबी वार यूपी कैसे बना इंडिया के लिए गेमचेंजर?

📅 20 Feb 2026

आज पूरे भारत में जितने मोबाइल फोन बनते हैं, उसमें से 55% मोबाइल उत्तर प्रदेश में बनते हैं। इतना ही नहीं यूपी अब सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूती देने में सबसे बड़ा योगदान देने को तैयार है। पीएम खुद ‘पुर्जे पुर्जे पर मेड इन इंडिया की छाप हो‘ की बात बोल चुके हैं। भारत के आत्मनिर्भर बनने, नए देशों के साथ साझेदारी बनाने व बढ़ाने और अमेरिकी टैरिफ से अपने उद्योगों को बचाने में यूपी और यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

UPITS-2025 को अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ लगाने का यूपी के एक कारगर जवाब के तौर पर भी देखा जा रहा है। जिससे रूस समेत मिडिल ईस्ट, लैटिन अमेरिकन, साउथ ईस्ट एशियन व अफ्रीकन देश यूपी के उद्योगों के नए खरीदार बनें। इंडियन आर्म्ड फोर्सेज स्वदेशी हथियार और यु़द्ध के सामान चाहती हैं और विदेशी टेक्निक पर निर्भरता को कम करना चाहती हैं। इसलिए सरकार भारत में ही एक वाइब्रेंट डिफेंस सिस्टम विकसित करने में गंभीर हैं। भारतीय सामानों पर 50 फीसदी अमेरिकी ट्रेड टैरिफ लगने से मिले कारोबारी झटकों के बाद इस आयोजन की अहमियत यूपी ही नहीं भारत के लिए भी काफी अहम हो गई थी। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो ने उत्तर प्रदेश को विकसित भारत के लिए एक गेमचेंजर की भूमिका दी है।

यूपीः तीन इंटरनेशनल ट्रेड शो वाला पहला राज्य

उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल बिजनेस वर्ल्ड में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। आज दुनिया भर के ग्लोबल ब्रांड्स यूपी में निवेश कर रहे हैं। तीन बार इंटरनेशनल ट्रेड शो का आयोजन करने वाला यूपी देश का पहला राज्य बन चुका है।
यूपी गर्वनमेंट ने 2023 व 2024 के पिछले दो इंटरनेशनल ट्रेड शो को राज्य में बदलते निवेश व उद्योगों में हुए बदलाव के तौर पर पेश किया था। इन दोनो इंटरनेशनल ट्रेड शोज में दर्जनों देशों ने हिस्सेदारी की और इन देशों के हजारों एग्जिबिटर्स के जरिए सरकार ने करोड़ों के एमओयू साइन किए। राज्य में ‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर‘, एक्सप्रेसवे, एयरपोट्र्स, मल्टी- मॉडल लॉजिस्टिक पार्क, इनलैंड वॉटरवेज़ और जेवर इंटरनेशनल हवाई अड्डा जैसे महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट्स हकीकत बन रही हैं। रशिया जैसे ग्लोबल पॉवर के पार्टनर कंट्री बनने से यूपी का दर्जा ग्लोबल प्लेफॉर्म पर एक स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट सेंटर रणनीतिक निवेश केन्द्र के तौर पर स्थापित कर रहा है और मेक इन यूपी के भरोसे को बढ़ा रहा है।

रूस से गुज़रेगी ग्लोबल मार्केट की राह

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025 की सबसे आकर्षक और प्रभावशाली बात रही रूस जैसी पॉवरफुल इकोनॉमी का उत्तर प्रदेश के साथ पहली बार जुड़ना। इस आयोजन में रूस बतौर पार्टनर कंट्री के तौर पर यूपी का सहयोगी बना है।
रूस जैसे पार्टनर कंट्री के होने से यूपी के उद्योगों, निवेश, टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट्स और इकोसिस्टम की पहुँच दुनिया भर में मजबूती से अपनी पैठ बनाएगी।

7 प्वाइंट्स में समझते हैं कैसे UPITS के जरिए यूपी के ग्लोबल खिलाड़ी बनने की राह रूस से होकर गुजरेगी-

1- 26 सितंबर 2025 को इंडिया-रूस बिजनेस डायलॉग का आयोजन हुआ। जिसमें चार दिनों में दोनों देशों के बीच 111 B2B मीटिंग्स हुईं। इन मुलाकातों में 30 रूसी कंपनियों ने 90 से ज्यादा भारतीय MSMEs और निर्यातकों से बिजनेस व इन्वेस्टमेट को लेकर प्लानिंग की।

2- इन मीटिंग्स में मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी, बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर, FMCG, आईटी और डिजिटल सॉल्यूशंस, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग, पर्यटन और पशुपालन पर डिटेल्ड चर्चा हुई। 

3- रूस की दिलचस्पी भारत में केवल एनर्जी या डिफेंस सेक्टर तक सीमित नहीं रही। वह अब भारतीय फूड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल इंडस्ट्री में भी इन्वेस्टमेंट और इंडस्ट्री की संभावनाएं तलाश रहा है।

4- रूस से आए डेलिगेशन के एक रेप्रेजेंटेटिव का कहना था, रूस में भारतीय फूड प्रोडक्ट्स की काफी मांग है, खासकर मसाले और रेडी-टू-कुक सामान की। जो यूपी के मसाले और रेडी-टू-कुक सामान के लिए बड़ा बाजार बनाने के दरवाजे खोलेगा।

5- आयोजन में ‘डूइंग बिजनेस इन रूस’ नॉलेज सेशन रखा गया। जिसका मकसद भारत और यूपी के उद्योगपतियों को रूस में व्यापार और निवेश की संभावनाओं के बारे में अवेयर करना था। जिससे एक्सपोर्ट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के मौके बढ़ाए जाएं। 

6- रूस व भारत सहयोग से यूपी की ग्लोबल पहुंच बढ़ेगी और इंडस्ट्रियल पॉलिसी, स्टार्टअप इकोसिस्टम और कृषि तकनीक समेत कई सेक्टर में हाई क्वालिटी इन्वेस्टमेंट की संभावनाएं साकार होंगी। 

7- भारत और रूस दोनो ही आपसी बिजनेस में डॉलर से हटकर लोकल करेंसी का यूज बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। एक्सपट्र्स का मानना है कि यह कदम अमेरिकी टैरिफ के नुकसान से बचने की एक कारगर रणनीति बन सकता है।

2,400 से ज्यादा एमओयू, रूस, अफ्रीका भी शामिल

ग्लोबल ट्रेड वॉर की तमाम उठापटक और आशंकाओं के बीच यूपीआईटीएस ने उत्तर प्रदेश में बड़े निवेश की उम्मीद भर दी है। इस आयोजन में बिजनेस टू  बिजनेस (B2B) हॉल में उद्यमियों और विदेशी खरीदारों के बीच सहमति बनने के बाद फौरन एमओयू (MOUs) साइन करने की भी व्यवस्था थी। यूपीआईटीएस-2025 में लगभग 11,200 करोड़ रुपए की व्यापारिक पूछताछ दर्ज हुई। इस आयोजन में यूपी सरकार और इंडस्ट्रीज, एजुकेशन वर्ल्ड और ग्लोबल इंस्टीट्यूट्स के बीच कुल 2,400 से ज्यादा एमओयू साइन हुए। जिनकी कुल राशि 1,882 करोड़ रुपए की रही। जिनमें रूस के अलावा अफ्रीका और एशिया के कई देशों के साथ एमओयू साइन हुए।

अमेरिकी टैरिफ संकट का यूपी से ‘समाधान‘

यूएस प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप के भारत के खिलाफ 50% ट्रेड टैरिफ लगाने से भारतीय MSMEs को झटका लगा है। खासकर टेक्सटाइल, लेदर, हैंडीक्राफ्ट और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे सेक्टर प्रभावित हुए हैं। वजह है अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट रहा है। यही कारण है कि यूपी के कई सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग सीधे तौर इस झटके से प्रभावित हुए हैं। मेरठ के स्पोर्ट्स गुड्स, मुरादाबाद का पीतल उद्योग और भदोही के कारपेट उद्योग लंबे समय से अमेरिकी मांग और निर्यात पर निर्भर रहे हैं। 50 परसेंट टैरिफ बढ़े तो अमेरिका से इन उद्योगों के ऑर्डर घटने लगे।

बीते दो महीने में ही अमेरिका से आने वाले ऑर्डरों में लगभग 20 से 25 फीसदी की गिरावट देखी है। UPITS- 2025 आयोजन के जरिए सरकार ने इसी संकट का समाधान खोजने की कोशिश की है। जिसमें रूस के अलावा मिडिल ईस्ट कंट्रीज, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और साउथ ईस्ट एशिया के डेलीगेशन पहुंचे थे। इस इंटरनेशनल ट्रेड शो ने इन तमाम देशों के डेलीगेशन को भारतीय MSMEs के रूप में नए बाजारों को जानने का मौका भी दिया। यही वजह रही कि इस आयोजन की थीम अमेरिकी टैरिफ की काट के तौर पर भी पहचानी गई।

ई- कॉमर्स और डिजिटल प्लेफॉर्म पर फोकस

यूपीआईटीएस 2025 में नए देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों की संभावनाओं को हकीकत में बदलने के लिए 17 नॉलेज सेशंस का भी आयोजन किया गया था। इन नॉलेज सेशन में पॉलिसी मेकर्स, उद्योग जगत के नेता, ग्लोबल बायर्स और इंटरनेशनल रेप्रेजेंटेटिव्स भी शामिल हुए। ‘विकसित यूपी 2047‘, ‘वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में स्टार्टअप्स की भूमिका‘ और ‘MEMEs के लिए ई-कॉमर्स की क्षमता‘ जैसे विषयों पर मंथन किया गया। इन सभी सेशन का फोकस एक ही था, अगर भारतीय सामनों के एक्सपोर्ट में अमेरिका और यूरोप जैसे पुराने बाजार कमजोर हो जाएं तो ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नए कंज्यूमर्स तक कैसे पहुंचा जाए।

सेशन में इस  बात पर जोर रहा कि भारत खासकर यूपी के छोटे उद्यमियों व व्यापारियों के लिए अमेजन, फ्लिपकार्ट और अलीबाबा जैसे बड़े ई-मार्केटप्लेस निर्यात की नई राहें कैसे बना सकते है। इससे साफ संकेत मिला कि यूपी का MSMEs सेक्टर अमेरिकी टैरिफ की मार झेलते हुए भी इनोवेशन और को ऑपरेशन के जरिए मजबूती से खड़ा रहने की कोशिश कर रहा है।

प्रोडक्ट क्वालिटी रहेगी बड़ी चुनौती

भारत के MEMEs सेक्टर की मजबूती में अमेरिका के इम्पोर्ट का बड़ा योगदान रहा है। भारत के उद्योगों से निकला तैयार माल सबसे ज्यादा अमेरिका के बाजार में ही बिकता रहा है। इसलिए अमेरिका के 50 परसेंट टैरिफ की मार से पूरी तरह बचना आसान नहीं। अमेरिका अब भी भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और यूपी के कई उद्योग उसके बिना नहीं चल सकते। लेकिन इस संकट के अलावा भी एक बड़ी चुनौती यूपी के उद्योगों के आगे है- क्वालिटी और स्केल।
इंटरनेशनल ट्रेड शो में आए कई विदेशी डेलीगेशन ने भारत खासकर यूपी के प्रोडक्ट्स को सराहा लेकिन इनकी क्वालिटी को लेकर वे उतने कॉंफिडेंट नहीं दिखे।

फॉरेन बायर्स का भारतीय सामान को लेकर एक ही क्लियर सुझाव था कि अगर आप ग्लोबल मार्केट में टिके रहना चाहते हैं तो प्रोडक्शन स्टैंडर्ड को और ऊंचा करना होगा। साथ ही डिमांड के मुताबिक क्वालिटी प्रोडक्ट की सप्लाई भी मार्केट में बनी रहे। इसमें रुकावट न आए। खुद पीएम मोदी भारतीय उद्योग से अपील कर चुके हैं कि सरकार मेक इन इंडिया, मैन्युफैक्चरिंग पर इतना जोर दे रही है। सरकार चिप से लेकर जहाज तक, सब कुछ भारत में बनाना चाहती हैं। लेकिन सरकार की कुछ अपेक्षाएं भी हैं कि भारतीय उद्योग जो भी निर्माण कर रहे हैं, वह बेस्ट क्वालिटी का हो। स्वदेशी प्रोडक्ट्स की क्वालिटी से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

 

इसे भी पढ़ें:

बजट 2026-2027 - एमएसएमई को ’चैम्पियन’ बनाने की चाह, ‘नए वर्ल्ड ऑर्डर’ में भारत की मजबूत राह

उत्तर प्रदेश बजट 2026-2027 यूपी बनेगा स्टार्टअप, इन्वेस्टमेंट, एग्री-एक्सपोर्ट और टेक्स्टाइल का हब

UPITS उत्तर प्रदेश के MSMEs और ODOP को ग्लोबल ब्रांड्स बनाने वाला ब्रह्मास्त्र

Share this post: 💬 WhatsApp 𝕏 Twitter
Chat on WhatsApp