उत्तर प्रदेश बजट 2026-2027 यूपी बनेगा स्टार्टअप, इन्वेस्टमेंट, एग्री-एक्सपोर्ट और टेक्स्टाइल का हब
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उत्तर प्रदेश बजट 2026-2027 यूपी बनेगा स्टार्टअप, इन्वेस्टमेंट, एग्री-एक्सपोर्ट और टेक्स्टाइल का हब

📅 16 Feb 2026

भारत के विकास, नीति-निर्धारण, आर्थिक उन्नति, राजनीतिक परिदृश्य और भौगोलिक महत्व में उत्तर प्रदेश का बेहद अहम स्थान है। विकसित भारत 2047 के विजन और ‘फाइव ट्रिलियन इकोनॉमी‘ के लक्ष्य को हासिल करने में उत्तर प्रदेश की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि 11 फरवरी 2026 को विधानमंडल में पेश किया गया उत्तर प्रदेश का बजट 2026-2027 न सिर्फ प्रदेश बल्कि देश की तेज रफ्तार उन्नति को नई ऊर्जा देने वाला रहा। बल्कि परंपरागत उद्योगों को वैश्विक मांग के अनुसार आधुनिक बनाने और ग्रामीण-शहरी विकास के बीच संतुलन बनाने वाला भी दिखा। बजट में सबसे ज्यादा फोकस प्रदेश को स्टार्टअप हब, टेक्सटाइल हब व एग्री-एक्सपोर्ट हब बनाने, लघु एवं मध्यम उद्योगों व हथकरघा-खादी उद्योगों को प्राथमिकता देकर नए रोजगार सृजित करने और युवाओं को उद्यमी बनाने पर किया गया है। इसके साथ ही विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत प्रदेश के बुनकरों को आर्थिक सुरक्षा देने पर भी इस बजट में जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश बजट 2026 में और किन सेक्टर्स पर खास प्राथमिकता रही, इस पर एक रिपोर्ट।

बजट में एक लाख करोड़ की बढ़ोतरी

कुल 9.12 लाख करोड रुपए के इस बजट को ‘नए भारत के नए उत्तर प्रदेश‘ का आधार बताया गया है। बजट में उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय 1.20 लाख रुपए होने का अनुमान जताया गया है। यह बजट पिछले साल के मुकाबले काफी बड़ा है और इसे राज्य की अर्थव्यवस्था को ‘वन ट्रिलियन डॉलर‘ बनाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 2026-2027 का यह बजट वित्तीय वर्ष 2025-26 के 8.08 लाख करोड़ रुपए के मूल बजट से एक लाख करोड़ रुपए से अधिक बढ़ाया गया है। पिछले बजट के मुकाबले इस बार बजट में 12.9 प्रतिशत की महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की गई है। विकास कार्यों को तेज गति देने के लिए पूंजीगत व्यय बेहद अहम होता है। इसलिए ही इस बजट में पूंजीगत व्यय में करीब 2.50 लाख करोड़ रुपए तक का प्रावधान किया गया है। जो कि कुल बजट का 19.5 प्रतिशत है।

अर्थव्यवस्था की रीढ़ ‘एमएसएमई‘ ही ग्रोथ इंजन 

राज्य के बजट 2026-2027 ने आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की नींव मजबूत की है। वजह है माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज, एमएसएमई सेक्टर पर बजट की खास प्राथमिकता। दरअसल उत्तर प्रदेश, रजिस्टर्ड एमएसएमई के मामले में देश के पांच अग्रणी राज्यों में से एक बना हुआ है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले एमएसएमई (MSME) में 3.11 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। यही वजह है कि एमएसएमई के लिए इस बजट में 3,822 करोड़ रुपए आवंटित कर सरकार ने न सिर्फ भरपूर तिजोरी खोली है, बल्कि सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों में नए रोजगार पैदा करने का एक ‘क्लियर रोडमैप‘ भी पेश किया है।  इसी कड़ी में ‘सरदार वल्लभभाई पटेल इम्प्लायमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन‘ की नई योजना के लिए 575 करोड़ रुपए और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के लिए 225 करोड़ रुपए का बजट भी शामिल हैं।

यूपीः स्टार्टअप्स और इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट का हब

उत्तर प्रदेश निवेश के मामले में देश ही नहीं बल्कि विदेशी कंपनियों का भी ‘मोस्ट फेवरेट डेस्टिनेशन‘ बनता जा रहा है। इतना ही नहीं उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग, (DPIIT) के अनुसार ‘स्टेट स्टार्टअप रैंकिग‘ में यूपी टॉप परफ़ॉर्मर बनने की राह पर है। इन्वेस्टर्स समिट में इंडस्ट्री इन्वेस्टर्स के साथ करीब 50 लाख करोड़ रुपए के समझौते (एमओयू) हो चुके हैं। इन एमओयू से उत्तर प्रदेश में लगभग 10 लाख नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। देश के कुल मोबाइल फोन प्रोडक्शन का 65 प्रतिशत हिस्सा, सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही तैयार हो रहा है, जो इसे भारत का सबसे बड़ा मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग सेंटर बनाता है। इनोवेशन और नई टेक्निक को बढ़ावा देने की वजह से उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर ‘लीडर‘ कटेगरी की रैंकिंग हासिल हुई है। इतना ही नहीं भारत की 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट यूनिट्स अकेले यूपी में ही हैं। वहीं यूपी का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 44,744 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। एआई के क्षेत्र में विकास के लिए ‘उत्तर प्रदेश एआई मिशन्‘ शुरू किया जा रहा है। इसके लिये बजट में 225 करोड़ रूपए की व्यवस्था की गई है।

यूपी को ‘युवा उद्यमियों का प्रदेश’ बनाने पर ज़ोर

इस बजट में युवाओं के स्किल डेवलपमेंट, ट्रेनिंग और नई नौकरियों पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। वहीं युवा उद्यमी योजना के तहत उन्हें उद्यमिता के जरिए आत्मनिर्भर बनाने पर फोकस किया गया है। ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान‘ हेतु 1,000 करोड़ रूपए की व्यवस्था इस बजट में प्रस्तावित है। वहीं ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना‘ के लिए भी 225 करोड़ रुपए आवंटित है। बजट में ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान‘ के तहत हर साल एक लाख नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के लिए युवाओं को गारंटी मुक्त और ब्याज मुक्त लोन उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार की ओर से 9 लाख से ज्यादा युवाओं को स्वरोजगार की ट्रेनिंग दी गई है। वहीं 5 लाख युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में नौकरियां दिलाई गईं।

उद्योगों के लिए बजट में 13 प्रतिशत वृद्धि

प्रदेश के उद्योगों के लिए भी वर्ष 2025-2026 की तुलना में इस बजट में 13 फीसदी ज्यादा का आवंटन किया गया है। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास की योजनाओं के लिये 27,103 करोड़ रूपए प्रस्तावित है। बजट 2026-27 में ‘मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तारीकरण‘ और ‘नए औद्योगिक क्षेत्र प्रोत्साहन योजना‘ में 5000 करोड़ रूपए प्रस्तावित है। वहीं ‘अटल इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन‘ के तहत अवस्थापना विकास के लिए 2,000 करोड रूपए आवंटित किए गए हैं। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरीडोर प्रोजेक्ट में 200 रक्षा उद्योगों की स्थापना हेतु समझौते एमओयू हो चुके हैं। इन एमओयू से 35,280 करोड़ रुपए का निवेश होना प्रस्तावित है। वहीं 53,263 लोगों को सीधे रोजगार मिलने की संभावना है।

आत्मनिर्भर महिलाएं ही उन्नत यूपी का आधार

उत्तर प्रदेश को उन्नत प्रदेश बनाने की राह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाए बगैर अधूरी ही है। इसी सोच के साथ बजट में शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष प्राथमिकता दी गई है। ग्रामीण महिला उद्यमियों को तैयार माल बेचने के लिए बाजार उपलब्ध कराने के लिए ‘शी-मार्ट‘ की स्थापना की जाएगी। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के बाद उद्यमी बनने पर जोर देगी। महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड और ब्याज मुक्त ऋण सुविधा की घोषणा भी इस बजट में की गई है। सेफ सिटी की अवधारणा को साकार करने और कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी बजट में जोर दिया गया है।नए शहरों में एक सुरक्षित और बेहतर निवास स्थान मुहैया कराये जाने के उद्देश्य से प्रदेश के नगर निगमों में वर्किंग वूमेन हॉस्टल का निर्माण किया जा रहा है।

श्रमजीवी महिला छात्रावास और महिला गाइड के लाइसेंस शुल्क में छूट जैसे कदमों से महिला श्रमबल भागीदारी को और अधिक बढ़ाने का लक्ष्य है। इस बजट में ‘कन्या विवाह सहायता‘ के तहत बेटियों की शादी के लिए दी जाने वाली सहायता राशि 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपए कर दी गई है। 58,000 ग्राम पंचायतों में 39,880 बीसी सखियों की ओर से 39,000 करोड़ का वित्तीय लेनदेन कर 107 करोड़ का लाभ कमाया है। इस योजना को और प्रोत्साहित किया जाएगा। सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत महिला पुलिस बीट, व्यापक सीसीटीवी नेटवर्क और एंटी रोमियों स्क्वाॅयड की तैनाती से सार्वजनिक स्थलों और कार्य स्थलों पर सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। ‘मिशन शक्ति‘ कार्यक्रम के तहत सुरक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सेवाओं के एकीकरण से महिलाओं की आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता को तेजी मिली है। ‘मुख्यमंत्री सुमंगला योजना‘ के अन्तर्गत जनवरी 2026 तक 26.81 लाख लड़कियों को लाभ हुआ है।

यूपी में बनेगा पहला एग्री-एक्सपोर्ट हब

कृषि उत्पादकता को बढ़ाने और किसानों की आय में बढ़ोतरी करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में जेवर एयरपोर्ट के पास एक कृषि निर्यात हब (एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट हब) स्थापित किया जाएगा। बजट में प्र्रस्तावित यह पहल विश्व बैंक द्वारा सहायता प्राप्त है और ‘यूपी एग्रीज प्रोजेक्ट‘ का हिस्सा है। यह पहल यूपी की चुनिंदा फसलों के बड़े पैमाने पर निर्यात की सुविधा प्रदान करेगी। साथ ही राज्य के 11 जिलों में कृषि विशेष आर्थिक क्षेत्रों का निर्माण करेगी। यह हब मूंगफली, सब्जियां, काला नमक चावल और तिल जैसी उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने पर फोकस करेगा, जिससे यूपी के एक्सपोर्ट पोर्टफोलियो को मजबूत किया जाएगा।

एसडीजी इंडिया इण्डेक्स में उत्तर प्रदेश की रैंकिंग जो वर्ष 2018-2019 में 29 वें स्थान पर थी, बेहतर होकर वर्ष 2023-2024 में 18 वें स्थान पर आ गयी है।  राज्य सरकार द्वारा फरवरी, 2024 में चैथे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का बेहद सफल आयोजन किया गया। इनमें से, अब तक लगभग 15 लाख करोड़ रुपए के निवेश की लगभग 16 हजार से ज्यादा प्रोजेक्ट्स के 4 ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह सम्पन्न हो चुके हैं।

टेक्नोलॉजी बनेगी उन्नत भविष्य की राह

टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप पर जोर देकर सरकार शहरी और शिक्षित युवाओं को बेहतर नौकरी पाने और स्वरोजगार शुरू करने को प्रेरित कर रही है।  इस बजट में स्टेट डेटा अथॉरिटी के गठन, डेटा सेंटर क्लस्टर, यू पी ए आई मिशन और साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर की स्थापना की भी घोषणा की गई है। यह भविष्य में यूपी की अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद बनेगी। स्किल डेवलपमेंट हब, डिजिटल आंत्ररप्रेन्योरशिप योजना व स्टार्टअप पर इस बजट में खास जोर दिया गया है।

आइआइटी कानपुर और आइआइटी बीएचयू के साथ ‘डीप टेक’ सहयोग के जरिए युवाओं के लिए रोजगार में नए मौके बनाए जाएंगे।  बजट में ही उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन‘ योजना लाई जा रही है।  उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाएगा। ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड श्रमिकों के लिए दुर्घटना बीमा और लेबर अड्डों के निर्माण का भी प्रस्ताव है।

यूपी का वस्त्र उद्योग बनेगा ‘टेक्सटाइल हब‘

बजट 2026-27 में हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बढ़ोतरी देखी गई है। प्रदेश सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर को प्राथमिकता देते हुए इस बजट में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में पांच गुना से भी अधिक की बढ़ोतरी की है।सरकार ने वस्त्र उद्योग क्षेत्र के लिए 5,041 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया है। इसका बड़ा फायदा गोरखपुर जैसे उभरते औद्योगिक जनपद को मिलेगा। इस वजह से गोरखपुर को ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना के तहत टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित करने की रणनीति तैयार की गई है।

वहीं उत्तर प्रदेश को गारमेंट हब बनाने के उद्देश्य से ‘पीएम मित्र पार्क‘ योजना के तहत एक वर्ल्ड लेवल मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित किया जाएगा। इस पहल से सिर्फ वस्त्रोद्योग क्षेत्र में ही 30,000 नए रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। स्थानीय स्तर पर टेक्सटाइल इकाइयों की स्थापना, लघु एवं मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहन और आधुनिक मशीनरी के उपयोग से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। ‘उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं गारमेन्टिंग पालिसी-2022’ को असरदार बनाने के लिए 150 करोड़ रुपए की भी व्यवस्था की गई है। ‘उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं गारमेन्टिंग पालिसी-2022’ नीति के तहत निवेशकों को अनुदान, पूंजी सब्सिडी और प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

ओडीओसी के लिए 75 करोड़ की सौगात

गोरखपुर में नई टेक्सटाइल यूनिट्स स्थापित होने पर स्थानीय बुनकरों, दर्जियों और कारीगरों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। इसके साथ ही, इस बजट में बुनकरों के उत्थान के लिए ‘अटल बिहारी वाजपेयी पावरलूम बुनकर विद्युत फ्लैट रेट‘ योजना के तहत 4,423 करोड़ रुपए की बड़ी व्यवस्था भी की गई है। वहीं ‘एक जनपद एक व्यंजन‘ (वन डिस्ट्रिक्ट वन कुज़ीन) ओडीओसी योजना के लिए इस बजट में 75 करोड़ रुपए का प्रस्ताव है। इस पहल के जरिए स्थानीय व्यंजनों के स्वाद और फूड उद्योग को एक साथ बढ़ावा देने की कोशिश की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-2027 में जल जीवन मिशन के समस्त घटकों के लिए करीब 22,452 करोड़ रूपए की व्यवस्था भी आवंटित है।

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